उत्तर प्रदेश में खेती की ज़मीन कैसे खरीदें
सीधा जवाब
उत्तर प्रदेश में खेती की ज़मीन खरीदने के लिए पहले UP भूलेख पर खतौनी में विक्रेता का नाम और हिस्सा देखें। फिर पक्का करें कि ज़मीन बेची जा सकती है और अधिग्रहण के लिए अधिसूचित नहीं है। मौके पर रास्ता देखें, उप-निबंधक कार्यालय में बैनामा कराएं और दाख़िल-ख़ारिज के लिए अर्ज़ी दें ताकि रिकॉर्ड में आपका नाम चढ़ जाए।
आखिरी बार अपडेट: · जांचकर्ता संपादकीय टीम · स्रोत
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और हर प्लॉट अलग होता है; खरीद के लिए राजस्व मामलों के जानकार स्थानीय वकील से सलाह लें।
पहला कदम: ज़मीन किसकी है और क्या वह बेच सकता है?
UP भूलेख पर ज़िला, तहसील और गांव चुनकर खाता या गाटा संख्या से खतौनी निकालें। देखें कि:
- विक्रेता का नाम दर्ज है, और साझेदारी हो तो उसका हिस्सा भी;
- जिस-जिस हिस्सेदार का हिस्सा है, वह बैनामे पर दस्तख़त करेगा;
- ज़मीन संक्रमणीय भूमिधरी की है। असंक्रमणीय भूमिधरी या सरकारी पट्टे की ज़मीन खुलकर नहीं बेची जा सकती;
- प्लॉट ग्राम सभा, तालाब, चरागाह या चक रोड के रूप में दर्ज नहीं है, क्योंकि ऐसी ज़मीन निजी तौर पर नहीं खरीदी जा सकती।
हर प्रविष्टि का मतलब हमारी खतौनी और खसरा गाइड में है।
दूसरा कदम: क्या गांव अधिग्रहण के लिए अधिसूचित है?
तहसील और ज़िले के भूमि अध्याप्ति कार्यालय से पूछें कि गांव किसी सड़क, इंटरचेंज या औद्योगिक नोड के लिए प्रारंभिक अधिसूचना में है या नहीं। अधिसूचना के बाद ऐसी ज़मीन की निजी बिक्री पर रोक लग जाती है और मुआवज़ा सरकारी दरों से मिलता है। जेवर लिंक पर UPEIDA ने निर्माण से काफ़ी पहले, जुलाई 2025 में ही बिक्री रोक दी थी। देखें अधिसूचित गांव और अधिग्रहण का जोखिम।
तीसरा कदम: मौके पर क्या है?
गांव का शजरा (नक्शा) लेकर, हो सके तो लेखपाल के साथ, ज़मीन देखने जाएं। मेड़ें नापें, रास्ता और उसकी मिल्कियत देखें, बिजली, सिंचाई, क़ब्ज़ा और खड़ी फ़सल जांचें। पड़ोसियों से पूछें कि सीमा पर कोई विवाद तो नहीं।
चौथा कदम: क्या मालिकाना हक़ साफ़ है?
IGRSUP पर पुराने बैनामे खोजें, ताकि पता चले कि प्लॉट पहले बिक या गिरवी तो नहीं रखा गया। तहसील और राजस्व न्यायालय में लंबित मुक़दमे पूछें। गांव में चकबंदी चल रही हो तो सावधान रहें, क्योंकि तब गाटा संख्या बदल सकती है।
पांचवां कदम: रजिस्ट्री में कितना ख़र्च होगा?
स्टांप ड्यूटी, तय कीमत और सर्किल रेट से बनने वाले मूल्य में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है। गांव का सर्किल रेट IGRSUP पर देखें। इस साइट पर स्टांप ड्यूटी की मौजूदा दर: जानकारी अभी सत्यापित नहीं; देखें सर्किल रेट और स्टांप ड्यूटी गाइड।
छठा कदम: बैनामा, फिर दाख़िल-ख़ारिज
उप-निबंधक कार्यालय में बैनामा कराएं; दोनों पक्ष पहचान पत्र और गवाहों के साथ जाएं। फिर तहसील में दाख़िल-ख़ारिज की अर्ज़ी दें ताकि खतौनी में आपका नाम चढ़ जाए। प्रमाणित प्रतियां संभालकर रखें।
किसे खेती की ज़मीन नहीं खरीदनी चाहिए?
NRI और OCI कार्डधारक विरासत के अलावा खेती की ज़मीन नहीं खरीद सकते। जो घर या कारख़ाना बनाना चाहते हैं, उन्हें जानना चाहिए कि आम तौर पर पहले ज़मीन को ग़ैर-कृषि घोषित कराना पड़ता है; देखें भू-उपयोग परिवर्तन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या उत्तर प्रदेश में कोई भी खेती की ज़मीन खरीद सकता है?
भारत में रहने वाले भारतीय नागरिक आम तौर पर UP में खेती की ज़मीन खरीद सकते हैं, लेकिन जोत की अधिकतम सीमा और कुछ ख़ास पाबंदियां लागू होती हैं, जैसे अनुसूचित जाति के मालिक की ज़मीन। FEMA के नियमों के तहत NRI और OCI कार्डधारक विरासत के अलावा खेती की ज़मीन नहीं खरीद सकते।
विक्रेता से कौन से काग़ज़ मांगें?
ताज़ा खतौनी जिसमें विक्रेता का नाम और हिस्सा हो, प्लॉट की खसरा प्रविष्टि, पिछला बैनामा या विरासत का रिकॉर्ड, विक्रेता के नाम दाख़िल-ख़ारिज का सबूत, प्लॉट दिखाता गांव का शजरा और विक्रेता के पहचान पत्र।
दाख़िल-ख़ारिज क्या है और क्यों ज़रूरी है?
दाख़िल-ख़ारिज यानी राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम चढ़ाना। बैनामे से मालिकाना हक़ बदलता है, लेकिन दाख़िल-ख़ारिज होने तक खतौनी में विक्रेता का ही नाम रहता है, जिससे क़र्ज़, मुआवज़ा और दोबारा बेचने में दिक्कत होती है। रजिस्ट्री के बाद तहसील में अर्ज़ी दें।
क्या ज़मीन जांचने से पहले बयाना दे सकते हैं?
खतौनी और अधिसूचना ख़ुद जांचने से पहले कोई पैसा न दें। अगर बयाना देना ही है, तो लिखित इक़रारनामा करें जिसमें प्लॉट, कीमत, समय-सीमा और काग़ज़ों में कमी निकलने पर बयाना लौटाने की शर्त लिखी हो।
क्या एक्सप्रेसवे के बगल वाली ज़मीन से सीधे एक्सप्रेसवे पर जा सकते हैं?
नहीं। गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां केवल इंटरचेंज से चढ़ती-उतरती हैं। किनारे के खेत को सड़क पर कोई गेट नहीं मिलता। पहुंच का अंदाज़ा गांव की सड़क और नज़दीकी इंटरचेंज की दूरी से लगाएं।
स्रोत
- Board of Revenue, Uttar Pradesh: UP Bhulekh land records · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा
- Stamp and Registration Department, Uttar Pradesh: IGRSUP: registration, circle rates and stamp duty · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा
- Government of Uttar Pradesh: Uttar Pradesh Revenue Code, 2006 (मूल लेख का लिंक अभी दर्ज नहीं) · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा
- Government of India: Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 (मूल लेख का लिंक अभी दर्ज नहीं) · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा
- Reserve Bank of India: RBI / FEMA rules on acquisition of immovable property in India by NRIs and OCIs (मूल लेख का लिंक अभी दर्ज नहीं) · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा