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खरीदारों के लिए गाइड

अधिसूचित गांव और अधिग्रहण का जोखिम

सीधा जवाब

जब सरकार किसी सड़क, इंटरचेंज या औद्योगिक नोड के लिए ज़मीन लेने की प्रारंभिक अधिसूचना जारी करती है, तो उस ज़मीन के लेन-देन पर रोक लग जाती है और मुआवज़ा सर्किल रेट पर आधारित सरकारी प्रक्रिया से तय होता है, खरीदार की चुकाई कीमत से नहीं। गंगा एक्सप्रेसवे या लिंक सड़क के पास ज़मीन खरीदने से पहले जांचें कि गांव अधिसूचित तो नहीं।

आखिरी बार अपडेट: · जांचकर्ता संपादकीय टीम · स्रोत

यह सबसे ज़रूरी जांच क्यों है?

नए एक्सप्रेसवे के पास जो चीज़ें खरीदारों को खींचती हैं, जैसे नई लिंक सड़कें, इंटरचेंज और औद्योगिक नोड, वही सरकारी अधिग्रहण भी लाती हैं। जो खरीदार बाज़ार भाव पर ज़मीन लेता है और फिर वह अधिग्रहित हो जाती है, उसे बरसों के इंतज़ार के बाद अपनी लागत से कम मिल सकता है।

प्रक्रिया कैसे चलती है?

2013 के भूमि अधिग्रहण क़ानून में सरकार पहले प्रारंभिक अधिसूचना जारी करती है। उस तारीख़ से ज़मीन के लेन-देन के लिए कलेक्टर की अनुमति चाहिए। इसके बाद आपत्तियां, जहां लागू हो वहां सामाजिक प्रभाव की प्रक्रिया, अंतिम घोषणा और मुआवज़े का अवॉर्ड आता है। UPEIDA रूट पर जल्दी बिक्री रोकने के लिए रोक का भी इस्तेमाल करता है, जैसा जेवर लिंक पर हुआ।

गांव की जांच कैसे करें?

  1. तहसील और ज़िला भूमि अध्याप्ति कार्यालय (आम तौर पर ADM के अधीन) में पूछें।
  2. UPEIDA की सूचनाएं और ज़िले की वेबसाइट देखें।
  3. अख़बारों में गांव के नाम के साथ “अधिसूचना” खोजें।
  4. अतिरिक्त सुरक्षा के लिए विक्रेता से लिखित बयान लें कि ज़मीन अधिसूचित नहीं है।

अभी सबसे ज़्यादा जोखिम कहां है?

  • जेवर लिंक के रूट पर, जहां बिक्री रोकी गई है।
  • संभल के औद्योगिक नोड के फ़ेज़ 1 और फ़ेज़ 2 वाले गांवों के आसपास; देखें संभल ज़िला।
  • हरदोई में सवाइजपुर के पास, जहां प्रस्तावित फ़र्रुख़ाबाद लिंक मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर खरीदी हुई ज़मीन बाद में अधिसूचित हो जाए तो?

अगर आपने अधिसूचना से पहले ठीक से रजिस्ट्री कराई है, तो आप मालिक हैं और सरकारी प्रक्रिया से मुआवज़े के हक़दार हैं। मुआवज़ा सरकार तय करती है, आपकी खरीद कीमत पर नहीं, इसलिए यह आपकी लागत से कम भी हो सकता है।

क्या प्रारंभिक अधिसूचना के बाद ज़मीन बेची जा सकती है?

2013 के भूमि अधिग्रहण क़ानून के तहत प्रारंभिक अधिसूचना के बाद कलेक्टर की अनुमति के बिना अधिसूचित ज़मीन का कोई लेन-देन नहीं हो सकता। ऐसी रोक तोड़कर हुई बिक्री को मुआवज़े में नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। अधिसूचित ज़मीन न खरीदें।

कैसे पता करें कि गांव अधिसूचित है?

तहसील और ज़िले के भूमि अध्याप्ति कार्यालय से पूछें और UPEIDA की सूचनाएं देखें। अधिसूचनाएं अख़बारों में भी छपती हैं, जिनमें एक स्थानीय भाषा का होता है। विक्रेता से लिखित बयान भी लें, पर केवल उस पर भरोसा न करें।

ज़मीन की बिक्री पर रोक क्या होती है?

किसी परियोजना के लिए चिह्नित इलाक़े में औपचारिक अधिग्रहण से पहले ही बिक्री की रजिस्ट्री रोक देना। UPEIDA ने जुलाई 2025 में जेवर लिंक के रूट पर ऐसी रोक लगाई।

स्रोत

  1. Government of India: Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 (मूल लेख का लिंक अभी दर्ज नहीं) · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा
  2. Reports on the Jewar–Ganga Expressway link (cabinet approval 4 Aug 2026; land sale freeze July 2025) (मूल लेख का लिंक अभी दर्ज नहीं) · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा
  3. UPEIDA: Ganga Expressway project page · हमारी टीम ने अभी नहीं जांचा